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कुछ दिनों पहले मैंने अपनी ज्यादाद के लिए एक वारिस को चुना। वह एक परमाणु था। जिसका नाम मैंने अमर रखा। अब वह कुछ दिनों से गायब है। उस परमाणु अर्थात अमर को ढूढ़ने के लिए विज्ञान के पास कोई भी युक्ति नहीं है। हाँ, संरचना को आधार मानकर उसकी खोज की जा सकती है।

  1. संरचना से अभिप्राय : उस परमाणु का स्वतंत्र अस्तित्व होना है।
  2. दूसरी शर्त : उस संरचना के समान दूसरा अन्य परमाणु ना होना है।
स्वतंत्र अस्तित्व होने के कारण ही, मैं उसका नाम अमर रख सका। यह कारण अन्य दुसरे शर्त से भिन्न है। संरचना ही किसी भी वस्तु, जीव, जंतु, पौधा, निर्जीव या विषय की प्रकृति निश्चित करती है।

विज्ञान के पास विशिष्ट संरचना ही एक मात्र विकल्प है। जिसे वह ईश्वर की उपस्थिति के रूप में प्रयुक्त कर सकता है। जिसे ब्रह्माण्ड के स्वरुप द्वारा जाना जाता है। जो अपरिवर्तित है। जिसके आधार पर प्रकृति निर्धारित होती है। अपरिवर्तित होने के कारण, इसे “आधारभूत ब्रह्माण्ड” कहना उचित होगा। परन्तु वर्तमान में यह संरचना मनुष्य को ज्ञात नहीं है।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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