ads

Style1

Style2

Style3[OneLeft]

Style3[OneRight]

Style4

Style5

प्रकाश को सरल रेखीय गति करने की प्रकृति के रूप में जाना जाता है। परन्तु वास्तविकता कुछ और ही है। प्रकाश को यह जानकारी तो रहती है कि वह सरल रेखीय गति कर रहा है। तथा निर्धारित स्थान को भी यही जानकारी रहती है कि प्रकाश उसके पास तक सरल रेखा में गति करते हुए आया है। परन्तु जब हम, प्रकाश की गत्यावस्था का अध्ययन निर्देशित तंत्र के रूप में करते हैं। तब निष्कर्ष कुछ और ही प्राप्त होते हैं। परन्तु इसका तात्पर्य यह नहीं होता है कि हम पहले गलत थे। या प्रकाश सरल रेखा में गति नहीं करता है। इस घटना को सामान्य सापेक्षिकता (व्यापक आपेक्षिकता) के सिद्धांत के प्रभाव के रूप में देखा जाता है।


इसे कुछ इस तरह से समझिये कि प्रकाश तो सरल रेखा में ही गति करता है। परन्तु गति का मार्ग ही घुमावदार है। इस घुमावदार मार्ग को गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव के रूप में देखा जाता है। क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल प्रकाश के मार्ग को ही विचलित कर देता है। यह घटना भौतिकी के सरलता और सहजता का प्रमाण है। आज.. पूर्व में लिखित भौतिकी की परिभाषा याद आ गई। "भौतिकी, इतनी सरल और सहज है जैसे कि बंद कमरे की खिड़की से मैं बाहर के वातावरण को देख तो सकता हूँ। परन्तु वहां तक जाने के लिए मुझे दरवाजे का रास्ता ही चुनना पड़ेगा।"

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
«
अगला लेख
नई पोस्ट
»
पिछला लेख
पुरानी पोस्ट
  • 1Blogger
  • Facebook
  • Disqus

1 Comment

comments powered by Disqus

शीर्ष