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अनंत का उपयोग सदियों से होता आया है। फिर भी हमारे द्वारा उसको अपरिभाषित कह देना कितना उचित है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि सिर के बालों को गिनने का कोई औचित्य समझ में न आने के कारण हमारे पूर्वजों ने बालों को बिना गिने ही अनंत कह दिया हो ! रेगिस्तान में बैठकर के रेत के दानों को गिनने में आने वाली समस्या के कारण रेत के दानों को अनंत कह दिया हो या फिर रात के समय तारों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम या ज्यादा दिखाई देने के कारण तारों को अनंत कह दिया हो। या फिर उस संख्या तक गिनती ही न आने के कारण उन सभी चीजों को अनंत कह दिया गया हो। जो एक नज़र में बहुत अधिक दिखाई देती हैं। बेशक अनंत होने का भ्रम कई कारणों की देन हो सकता है। परन्तु विज्ञान में भिन्न-भिन्न शब्दों के संयोग से अनंत के कई अर्थ निकलते हैं। इसके बाबजूद अनंत को अपरिभाषित ही कहा जाता है। परन्तु विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र में जहाँ-जहाँ अनंत का उपयोग होता है। उसके पीछे की वजह स्पष्ट होती है। आइये.. विज्ञान के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अनंत को परिभाषित करतें हैं।


  1. भौतिकी में : इसमें शामिल होने के लिए ऐसा कुछ भी शेष नहीं रह जाता। जिसका अस्तित्व हो।
  2. खगोल विज्ञान में : गत्यावस्था की असीम संभावनाएँ
  3. गुरुत्वाकर्षण द्वारा : जहाँ से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल की सीमा समाप्त हो जाती है।
  4. प्रकाशिकी में : जहाँ से प्रकाश किरणें समान्तर आती हुई प्रतीत होती हैं।
  5. अंक गणित : अनिश्चित मान के लिए
  6. फलन गणित : मुख्यतः भागफल की प्रक्रिया द्वारा प्राप्त अपरिभाषित संख्या..
  7. ज्यामिति में : किन्ही दो समान्तर रेखाओं का कटान बिंदु
  8. रेखा गणित में : किसी बिंदु से गुजर सकने वाली रेखाओं की संख्या अथवा किसी रेखा को निर्मित करने में उपयुक्त बिन्दुओं की संख्या
  9. मापन में : सर्वाधिक मान के लिए
  10. गणना में : अधिकतम मान के लिए, अनगिनित (जिन्हें किसी कारणवश गिनना असंभव हो।)
  11. अनंत ब्रह्माण्ड (अनंत : विशेषता के रूप में) : समांगी ब्रह्माण्ड का अस्तित्व होना।
  12. अनंत घनत्व : अंतरिक्ष की अनुपस्थिति अथवा ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का समय या विलक्षणता (Singularity : बिंदु 9 का उदाहरण)
  13. अनंत द्रव्यमान : अवयवी पदार्थ में समरूपता अथवा ब्रह्माण्ड के एक से अधिक प्रतिरूप होने की सम्भावना
  14. अनंत ऊर्जा (ऊष्मा गतिकी में) : एक से अधिक ब्रह्माण्ड होने की अवधारणा का जन्म
  15. अनंत अंतरिक्ष (ब्रह्मांडिकी में अनंत : विशेषता के रूप में) : ब्रह्माण्ड का प्रसारित होना।
  16. अनंत आयाम (क्वांटम भौतिकी में) : स्वतंत्र ब्रह्माण्डों का समूह
  17. अनंत काल : सतत परिवर्तन या परिवर्तनशीलता
  18. अनंत आवर्तकाल (विशेष सापेक्षता सिद्धांत) : घड़ी का सुस्त पड़ना अथवा अपरिवर्तन
  19. अनंत गति : वस्तु का अदृश्य होना।
  20. अनंत भुजा या अनंत कोण से निर्मित आकृति : वृत्त
  21. अनंत समतल से निर्मित संरचना : गोलाकार
बेशक यह सूची अधूरी हो सकती है। जब कभी इस सूची को आगे बढ़ाने वाले अनंत के अन्य अर्थ प्राप्त होंगे। तब हम इस लेख में आवश्यक संशोधन करेंगे।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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2 Comments

  1. धन्यवाद। पॉइंट 7 में "समांतर बिन्दुओं" से क्या अभिप्राय है?

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    1. गलती के लिए माफ़ी चाहूँगा।
      गलती को सुधार लिया गया है। ध्यान दिलाने के लिए शुक्रिया..

      हटाएं

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