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हालाँकि, गणित और मैथ्स को एक ही माना जाता है। परन्तु सभ्यताओं में इनकी उत्पत्ति और सभ्यताओं के विकास में इनके अर्थ, भिन्न-भिन्न हुआ करते थे। जहाँ एक तरफ गणित का व्यवहारिक उपयोग आर्यों के भारत आने के साथ ही प्रारंभ हुआ। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी सभ्यताओं में मैथ्स को आत्म-ज्ञान का विषय माना जाता था। ज्यामिति का उपयोग व्यवहारिक रूप से हवन-कुण्ड बनाने में और उसे मिटाकर उतने ही भाग से किसी दूसरी संरचना का हवन-कुण्ड बनाने में होता था। अर्थात दूसरी बार हवन कुंड बनाते समय न ही मिट्टी को अलग से मिलाना है। और न ही पहले वाले हवन कुंड से मिट्टी को अलग करना है। यह सब युक्लिड और पाइथागोरस की ज्यामिति की रचना से पहले की बात है। इन कार्यों को शूल्व सूत्र के द्वारा संपन्न किया जाता था। परन्तु इस तरह से ज्यामिति कुछ लोगों तक सीमित थी। इनके विशेषज्ञों द्वारा ही ऐसे कार्य सम्पन्न हो सकते थे। तब तक ज्यामिति ने विषय का रूप नहीं लिया था। गणित इसी तरह से उपयोगी था। परन्तु युक्लिड ने ज्यामिति को विषय रूप प्रदान किया। खैर…

मैथ्स को आत्म-ज्ञान का विषय माना जाता था। अपनी धारणाओं को अभिव्यक्त करने में इसका उपयोग होता था।


वर्तमान में भी गणित को उपयोगी दृष्टी से अलग-अलग किया जा सकता है। एक तो प्रोधौगिकी या तकनीकी विकास में अर्थात व्यवहारिक उपयोगिता। और दूसरा प्रकृति को जानना में… परन्तु भाषाओं के शब्दों में एक से अधिक अर्थ निहित होने के कारण, गणित का आत्म-ज्ञान के रूप में उपयोग करना। प्रकृति को जैसा का तैसा जाना जा सकता है। वो भी गणित को आत्म-ज्ञान रूप में प्रयोग करके। क्योंकि बहुत सी भौतिकीय घटनाओं को आप व्यवहारिक दृष्टी में वैसा नहीं देख पातें हैं। जैसा कि घटनाएँ, घटित होती हैं। आपको यह जानकारी हो सकता है स्पष्ट न लगती हो..। परन्तु आप इस जानकारी को जानने के बाद स्वयं ऐसे उदाहरण को पहचान पाएंगे। तब आप भी गणित भाषा का उचित प्रयोग कर सकेंगे।

“आधारभूत ब्रह्माण्ड” भी ब्रह्माण्ड का एक गणितीय भौतिक स्वरुप है। जिसे व्यवहारिक रूप में देख पाना असंभव है।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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