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माध्यमिक शालाओं में और विशेषकर विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को जब कभी प्रायिकता संबंधी अध्याय पढ़ाने की आवश्यकता होती है। तब शिक्षकों द्वारा प्रायिकता को समझाने के लिए "संभावना" का प्रयोग किया जाता है। शुरूआती दौर तक "संभावना" (Possibility) को ही प्रायिकता (Probability) मानना उचित था। परन्तु जब हम प्रायिकता (गणितीय संभावना) का उपयोग भौतिकी में करते हैं। तब प्रकृति का स्पष्ट चित्रण हमारे मन में नहीं बन पाता। जिससे की हमें प्रकृति को समझने में कठनाइयों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि प्रकृति, प्रायिकता पर कार्य करती है संभावनाओं पर नहीं। आइये देखते हैं कि संभावना (Possibility) और प्रायिकता (Probability) में कैसी भिन्नता है।


  1. संभावना के लिए घटना का घटित होना आवश्यक नही है। जबकि प्रायिकता में घटना का घटित होना जरुरी है।
  2. संभावना किसी एक (विशेष) घटना के घटित होने को लेकर व्यक्त की जाती है। जबकि प्रायिकता में, उसी एक घटना में एक समान परिणाम की अन्य सभी घटनाओं की संभावनाओं को एक साथ व्यक्त किया जाता है।
  3. अर्थात संभावना में एक आधार कार्यरत होता है। जबकि प्रायिकता में एक से अधिक आधार कार्यरत होते हैं।
  4. स्वाभाविक रूप से घटना के घटित होने की संभावना को मापा जाता है। जबकि प्रायिकता में एक समान परिणाम वाली घटनाओं की संभावनाओं को गिना जाता है।
  5. संभावना का मान शून्य से लेकर शत प्रतिशत तक होता है। जबकि प्रायिकता का मान शत प्रतिशत से शून्य की ओर अग्रसर होता है। परन्तु शून्य कभी नही हो सकता।
  6. संभावना पूर्ववर्ती घटनाओं पर निर्भर करती है। जबकि प्रायिकता का पूर्ववर्ती घटनाओं के साथ किसी भी प्रकार का सम्बन्ध नहीं होता है।
  7. फलस्वरूप कारकों के आधार पर संभावना एक भौतिकीय अवधारणा कहलाती है। जबकि घटकों के आधार पर प्रायिकता एक गणितीय अवधारणा कहलाती है।
  8. संभावना को एक हद तक निश्चित किया जा सकता है। परन्तु प्रायिकता पूर्ण रूप से एक अनिश्चित अवधारणा है।
संभावना और प्रायिकता का भौतिकीय अर्थ, उनके उदाहरण और विज्ञान में उनकी उपयोगिता को आने वाले लेखों में पढ़ा जा सकता है।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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2 Comments

  1. प्रायिकता को उदहारण से समझा सकते हैं?

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    उत्तर
    1. बिलकुल प्रायिकता को उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है। इसे आप यूँ समझिए कि जब एक लालची व्यक्ति जो पैसा कमाना चाहता है, को इस बात का पता चलता है कि किसी पांसे को ऊपर उछालने पर एक आने की सम्भावना छः बार में एक होती है। वह हर बार एक अंक आने के लिए दाव लगाता है। तब वह चालाकी से पांच बार पांसा उछालने पर कम पैसे का दाव खेलता है। अब आपसे एक प्रश्न है कि क्या छटवी बार में उस पांसे पर एक अंक आएगा ? जबकि उस लालची इंसान ने इस बार सारे पैसे दाव में लगा दिए हैं !

      बेशक इस बार भी एक आने की प्रायिकता छः में से एक ही है। उस लालची इंसान ने प्रायिकता को सम्भावना समझकर पूरे पैसे दाव में लगा दिए। इसीलिए हमने उस लालची इंसान की सोच के मुताबिक पहले गद्यांश में प्रायिकता के स्थान पर सम्भावना शब्द का उपयोग किया है। जबकि वहां प्रायिकता शब्द होना चाहिए था। और इस छटवी बार में पांसे को उछालने पर क्या परिणाम होगा ? यह हम निश्चित रूप से नहीं कह सकते हैं।

      पांसा, सिक्का, तांस की पत्ती अर्थात ऐसी सभी प्रणालियाँ जिनमें घटना के घटित होने की "सभी संभावनाओं" को हम जानते हैं। ऐसी प्रणालियों में प्रायिकता कार्यरत होती है। शेष प्रणालियों में सम्भावना कार्यरत होती है। दरअसल उस समय इस लेख को सिर्फ गणित की दृष्टी से लिखा गया था। भौतिकी घटनाओं में इनके उपयोग को लेकर लेख लिखा जाना अभी बांकी है। उसके लिए आपको इंतज़ार करना होगा। यदि अभी भी आपको समझने में कोई समस्या आ रही हो, तो सूचित कीजियेगा। शुक्रिया..

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