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प्राकृतिक नियमों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि ये नियम भौतिकता के रूपों का आपसी व्यवहार है। और वहीं व्यावहारिक नियम एक निश्चित सीमा तक व्यवस्था कायम करने की युक्ति है। प्राकृतिक नियम, ये वे नियम हैं जो टेस्ट टिउब बेबी, कृत्रिम खून, अविष्कार और कृत्रिम पौधे जैसी व्यवस्था को भी संचालित करते हैं। जबकि टेस्ट टिउब बेबी, कृत्रिम खून, अविष्कार और कृत्रिम पौधे जैसी चीजों को मनुष्य ने बनाया है !! इस स्थिति में “टेस्ट टिउब बेबी” या “कृत्रिम खून” को प्राकृतिक न मानना हमारी गलती होगी। प्राकृतिक नियम उन सभी चीजों पर भी लागू होते है जिन्हें हम बना सकते हैं। वास्तव में ये उस पदार्थ में लागू होते हैं जिसके उपयोग से हम अपनी कल्पना को साकार रूप देते हैं। 


नियमों के आधार पर ही ब्रह्माण्ड के समूह की अवधारणा सामने आई। ब्रह्माण्ड के समूह की अवधारणा के अनुसार एक से अधिक ब्रह्मांड का अस्तित्व संभव हैं। और इस असीम अंतरिक्ष में एक से अधिक ब्रह्माण्ड का अस्तित्व नियमों के आधार पर ही संभव है। तात्पर्य प्रत्येक ब्रह्माण्ड को नियमों के आधार पर ही भिन्न- भिन्न समझा जाता है। और उसे ब्रह्माण्ड की गिनती में शामिल कर लिया जाता है।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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