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भौतिकी, इतनी सरल और सहज है, जैसे कि बंद कमरे की खिड़की से मैं बाहर के वातावरण को देख तो सकता हूँ। परन्तु वहाँ तक जाने के लिए मुझे दरवाजे का ही रास्ता चुनना पड़ेगा।
  • प्राकृतिक नियम भौतिकता के रूपों का आपसी व्यवहार है। और वहीं व्यावहारिक नियम एक निश्चित सीमा तक व्यवस्था कायम करने की युक्ति है।
  • वास्तविकता यह नही है कि आप उसे देख नही सकते। वास्तविकता यह है, जिसे आप देख पा रहे हैं उसके निर्माण में कौन-कौन से अवयव और घटक कार्यरत हैं।
  • विज्ञान, वह युक्ति है जो प्रत्येक अस्तित्व को प्रमाणिकता प्रदान करती है। जिसका अस्तित्व नहीं होता, विज्ञान के लिए उसको प्रमाणित करना असंभव है।
  • ब्रह्माण्ड की विशिष्ट संरचना का रचित, निर्मित, उत्पन्न या पैदा होना। ब्रह्माण्ड की गणितीय अवधारणा को जन्म देना है। क्योंकि यह संरचना समझने योग्य है।
  • हम उन सभी चीजों को देख सकते हैं। जिन्हें देखा जा सकता है। चाहे उनका आकार अतिसूक्ष्म ही क्यों ना हो। लेकिन उन रचनाओं को नहीं देखा जा सकता। जिसके कारण हम दृश्य जगत को देख पाते हैं। इसे ही अदृश्य जगत कहा जाता है।
  • विज्ञान के सामने समस्या यह है कि असंगत परिस्थितियों का अस्तित्व संभव नही है।
  • गणना और मापन की प्रक्रिया में अनंत का उपयोग क्रमशः अधिकतम और सर्वाधिक मान को दर्शाने के लिए किया जा सकता है। परन्तु दोनों मान के लिए अनंत का भौतिकीय अर्थ भिन्न-भिन्न होता है।
  • ब्रह्माण्ड की भौतिकता के अस्तित्व के लिए स्वाभाविक और स्वतः दोनों क्रियाएँ जिम्मेदार हैं। इनका आपसी गहरा सम्बन्ध है। जो आधारभूत ब्रह्माण्ड पर आधारित हैं।
  • भौतिकता के रूपों के अस्तित्व के लिए जरुरी है कि वे सभी क्रियाओं में भागीदार हों। इस तरह ब्रहमांड के सभी मूलभूत अवयव जो किसी अन्य भौतिकता के रूपों से निर्मित नहीं हैं, ब्रहमांड के अन्य सभी अवयवों से संबंध बना पाते हैं।
  • ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति को लेकर भिन्न-भिन्न मान्यताएँ हैं। इन सभी मान्यताओं में भिन्नता का कारण ब्रह्माण्ड की सीमा है। ब्रह्माण्ड की सीमा लोगों की अवधारणाओं को पृथक करती है। सीमा अर्थात किसी अन्य ब्रह्माण्ड की भी परिकल्पना करना।
  • भौतिकता के अधिकतम मान को भौतिक रूप या ब्रह्माण्ड कहते हैं। इसमें शामिल होने के लिए ऐसा कुछ भी शेष नही रह जाता है। जो भौतिकता के गुणों को दर्शाता हो।
  • भौतिक विज्ञान का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत "कोणीय संवेग की अविनाशिता" है। जिसके अनुसार घूमती हुई कोई भी वस्तु, यदि सिकुड़े तो उसकी घूमने की गति बढ़ जाती है।
  • गतिमान पदार्थों की गतिज ऊर्जा उनके भारों के अनुपात में बढ़ती है, जबकि उनकी परस्पर स्थितिज ऊर्जा (गुरुत्वाकर्षण की ऊर्जा) उनके भारों के वर्ग के अनुपात में बढ़ती है।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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2 Comments

  1. Wow thats such a interesting topic you write about.Congrats on IBA win :)

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    1. अंकिता जी शुक्रिया.. भौतिकी की दुनिया में आपका स्वागत है।

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