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न्यूटन ने गुरूत्वाकर्षण बल की खोज के लिए गिरते हुए सेब से प्रेरणा मिलने की बात एक विद्वान विलियम स्टुकली को बताई थी। जिन्होंने 1752 में न्यूटन की जीवनी में इस घटना का उल्लेख किया है।

घटना के अनुसार सर आइसक न्यूटन के दिमाग में यह विचार आया था कि "प्रत्येक वस्तु पृथ्वी के केंद्र की ओर ही क्यों गिरती है !" वर्तमान में कुछ संकीर्ण सोच वाले लोगों द्वारा परिहास करते हुए कहा जाता है कि सर आइसक न्यूटन सेब के गिरने से पहले कभी लघुशंका या दीर्घशंका नहीं गए थे क्या ?? इन लोगों के अनुसार सेब के गिरने से आइसक न्यूटन को विचार आया था कि वस्तु नीचे की ओर ही क्यों गिरती है !


जबकि सर आइसक न्यूटन के दिमागी विचार और संकीर्ण सोच वाले लोगों के विचार में बहुत अधिक फ़र्क है। सर आइसक न्यूटन के विचार में पृथ्वी के गोलाकार (लगभग) होने का तथ्य निहित है और गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गिरती हुई प्रत्येक वस्तु की गति की दिशा निर्धारित करने की क्षमता भी है। सर आइसक न्यूटन का विचार संरचनीय गुणों से परिपूर्ण है। विचार द्वारा संरचनीय गुणों के महत्व को समझा जा सकता है। जबकि उस संकीर्ण सोच में इस तरह का कोई भी तथ्य अथवा ज्ञान निहित नहीं है। 

हमारा विचार : जब सर आइसक न्यूटन के सिर पर वह सेब गिरा होगा। तब उनका ध्यान गिरती हुई प्रत्येक स्वतंत्र वस्तु की गति की दिशा की ओर गया होगा ! उनका सोचना होगा कि यह सेब मेरे सिर पर ही क्यों गिरा ! आजू-बाजू क्यों नहीं गिरा ! कहीं मैं किसी अदृश्य बल के बीच में तो नहीं हूँ। यदि वह सेब उनके सिर पर नहीं गिरता तो यह तय था कि गुरुत्वाकर्षण बल की खोज आइसक न्यूटन के हाथों नहीं होती।
सर आइसक न्यूटन के इस विचार से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि गुरुत्वाकर्षण बल एक केन्द्रीय बल है। क्या वाकई गुरुत्वाकर्षण बल एक केन्द्रीय बल है !!

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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