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आने वाले समय में
आने वाली पीढ़ी को
यह पूंछना न पड़े 
क्या होते थे पेड़ ?
किस धर्म, किस जाति के थे ?
वे लम्बे-लम्बे पेड़

क्यों रोती हो मम्मी
क्यों रोते हो पापा
क्या ?? वे महापुरुष थे !! 
या थे हमारे रिश्तेदार
आपको क्यों आती है उनकी
पूर्वजों जैसी याद ??



नही बेटा
न ही वे महापुरुष थे
और न ही थे रिश्तेदार
इन सब से बढ़कर थे वे
जिनका हमने नहीं रखा
आपके जैसा ख्याल

वह हमारी नादानी थी
या थी हमारी बेवकूफी
या हमारे सीखने की उम्र
या फिर हमारा अपना अहम
हाँ, हम स्वीकारते हैं
हमसे बड़ी गलती हो गई

कहीं ऐसा ही न हो
कविता सच में दोहराई जाए
हम करें वनों का संरक्षण
बना रहेगा पर्यावरण संतुलन
रहेगा हमारा भविष्य सुरक्षित
हमारा और हमारे परिवार का

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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