ads

Style1

Style2

Style3[OneLeft]

Style3[OneRight]

Style4

Style5

सर अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम पूरे विश्व में प्रसिद्द है। विज्ञान संकाय के विद्यार्थी से लेकर दर्शन, कला, राजनीति और अर्थशास्त्र तक के विद्यार्थी सर अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम और उनकी खोज के बारे में जानते हैं। आप अपने विचार रखिये और बस यह कह दीजिये कि यह विचार/कथन सर अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहे हैं। तो शायद ही कोई उस विचार/कथन से असहमति जताता है। सर अल्बर्ट आइंस्टीन आज हमारे बीच में न रहते हुए भी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। क्योंकि विज्ञान में खोज और घटनाओं को लेकर उनकी भविष्यवाणियां आज भी सच साबित हो रही हैं। इसलिए उनका नाम सिर्फ विज्ञान के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि समाज से सरोकार रखने वाला व्यक्ति भी उनके नाम से परिचित है।

पश्चिमी द्वार | स्रोत
पश्चिमी द्वार का दक्षिणी भाग | स्रोत

एक उदाहरण है जो सर अल्बर्ट आइंस्टीन की प्रसिद्धि को जगजाहिर करता है। डॉ हैरी एमर्सन फॉस्डिक सन 1925 में रिवरसाइड चर्च के मंत्री के पद के लिए चुने गए थे। वे आधुनिकवाद और रूढ़िवाद के बीच की बहस में हमेशा फंसे रहते थे। उन्होंने अनेक बातों की परवाह किये बिना सन 1929 में चर्च की एक नई और बड़ी ईमारत बनाने की योजना बनाई। तो जॉन डी रॉकफेलर जूनियर ने उस ईमारत के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था की। यह प्रोटेस्टेंट चर्च हडसन नदी पर नदी के किनारे न्यूयॉर्क शहर में बनाया जाना था। जिसके पश्चिमी द्वार में उस समय तक के विश्व प्रसिद्द 600 महान व्यक्तियों की मूर्तियां लगाई जानी थी। डॉ हैरी एमर्सन फॉस्डिक ने लगभग-लगभग सभी बड़े विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों को खत भेजकर महान वैज्ञानिकों के नामों की सूची देने के लिए निवेदन किया। योजना के अनुसार सिर्फ 14 महान वैज्ञानिकों की मूर्तियां द्वार में लगाई जानी थीं।

सर अल्बर्ट आइंस्टीन (दाहिने हाथ से दूसरे) | स्रोत

लम्बी बहस के बाद अंततः सर अल्बर्ट आइंस्टीन न केवल वैज्ञानिकों बल्कि उन सभी 600 महान व्यक्तियों (महात्माओं, दार्शनिकों, राजाओं, वैज्ञानिकों आदि) में से एक मात्र ऐसे महान व्यक्ति थे, जिनके जीते जी उनकी मूर्ति को चर्च के द्वार पर लगाया गया था। उससे भी मजेदार बात यह थी कि सर अल्बर्ट आइंस्टीन एक मात्र ऐसे वैज्ञानिक थे जिनका नाम सभी विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों की सूची में शामिल था। जबकि आर्किमिडीज, यूक्लिड, गैलेलियो और न्यूटन का नाम अधिकतर सूचियों में ही शामिल था। ईमारत के तैयार हो जाने के बाद सन 1930 में न्यूयॉर्क दौरे पर सर अल्बर्ट आइंस्टीन और उनकी पत्नी रिवरसाइड चर्च गए थे। जहाँ पर उन्होंने स्वयं की मूर्ति के अलावा हिप्पोक्रेट्स, यूक्लिड, पाइथागोरस, आर्किमिडीज, गैलीलियो, केपलर, न्यूटन, फैराडे, डार्विन और पाश्चर जैसे महान वैज्ञानिकों की मूर्तियां देखी थीं। जिन्हें देखते हुए उन्होंने शरारती मुस्कान के साथ कहा था कि "इन मूर्तियों का केवल एक ही जीवित प्रतिनिधि है और वह मैं स्वयं हूँ।"

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
«
अगला लेख
नई पोस्ट
»
पिछला लेख
पुरानी पोस्ट
  • 1Blogger
  • Facebook
  • Disqus

1 Comment

  1. vidit gyan ko vigayan kahete hai baki sab par lokik ya para vigyan kahker mithya kahker ku pracharit kiya jata raha hai

    उत्तर देंहटाएं

comments powered by Disqus

शीर्ष