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जो (भी) है सिर्फ़ वही विज्ञान का कार्यक्षेत्र है। जबकि जो नही है वह भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत अाता है। इसलिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण का कार्यक्षेत्र न केवल विज्ञान के कार्यक्षेत्र से अधिक व्यापक होता है। बल्कि विज्ञान का कार्यक्षेत्र भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आता है।

जो (भी) है, एेसा क्यों है ? ऐसा कैसे है ? अर्थात भौतिकता के रूपों और घटनाओं के कारण तथा प्रकार्य को जानने/खोजने और उसका अध्ययन करने तक विज्ञान कार्य करता है। जबकि "यदि ऐसा नहीं होता" या " यदि ऐसा होता" के परिणामस्वरूप क्या होता को जानने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उपयोग किया जाता है। जो नहीं है और जो हो सकता है, उसके बारे में यथार्थता के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण के द्वारा जानकारी जुटाई जा सकती है। क्योंकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण संगतता पर आधारित होता है। इस आधार पर संभावनाओं को लेकर तर्क-वितर्क किए जा सकते हैं और चर्चा के दौरान सभी एक मत भी हो सकते हैं। शर्त सिर्फ इतनी सी है कि चर्चा के दौरान सभी पक्षों को विषय संबंधी कारक और घटकों की उपस्थिति तथा उनकी मात्रा की जानकारी पहले से ज्ञात होनी चाहिए।

विज्ञान का कार्य सभी स्तरों में प्रकृति के अध्ययन तक सीमित होता है।

दिन-रात क्यों होते हैं ? पाचनतंत्र कैसे कार्य करता है ? प्रश्नों के उत्तर विज्ञान द्वारा खोजे जाते हैं। जबकि यदि सूर्य नहीं होता तो क्या होता ? या मंगल ग्रह में जीवन होता तो कैसा (किस तरह का) होता ? प्रश्नों के उत्तर वैज्ञानिक दृष्टिकोण द्वारा दिए/खोजे जाते हैं।
विज्ञान, उस धारदार चाकू के समान है जिसका उपयोग करना हमारे हाथों में है। या तो आप उससे सब्जी/फलों को काटकर अपने दैनिक जीवन में उसका उपयोग कर सकते हैं। या फिर उससे किसी की हत्या करके पूरे जीवन जेल में रहकर हत्या का अफ़सोस मना सकते हैं। विज्ञान न ही अच्छा होता है और न ही बुरा। हमारे द्वारा उसको उपयोग में लाने के बाद विज्ञान के प्रभाव अच्छे और बुरे कहलाते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अभाव में तकनीक विकसित करना असंभव है। अर्थात वैज्ञानिक दृष्टिकोण के द्वारा ही तकनीक को साकार रूप दिया जाता है। विज्ञान का उपयोग किया जाता है। आविष्कार किये जाते हैं। जो आज से पहले नहीं थे। उन्हें निर्मित किया जाता है। यह तब भी संभव है जब लोगों को तकनीकी ज्ञान होने के बाबजूद उसके पीछे का विज्ञान ज्ञात नही होता है। कंप्यूटर को कैसे उपयोग में लाया जाता है ? किस खराबी को कैसे दूर किया जाता है ? यह सब उन लोगों से बखूबी आता है। परन्तु यह क्यों किया जाता है ? कंप्यूटर कैसे कार्य करता है ? अर्थात उसके पीछे के विज्ञान से वे (लोग) अंजान रहते हैं। यह इस बात का संकेत है कि भले ही उन्हें विज्ञान का ज्ञान न हो। परन्तु उन लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। जो समाज के लिए हितकारी है। परन्तु ऐसा होने से विज्ञान की उपयोगिता कम नही होती है। विज्ञान की अपनी यह विशेषता है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण की व्यापकता में वृद्धि करता है। हमें जितनी अधिक विज्ञान की जानकारी होगी। हमारी दृष्टी संगतता के आधार पर उतनी ही व्यापक होती चली जाएगी। विज्ञान के माध्यम से हम यह भी जान पाएंगे कि जो (जिनका अस्तित्व) आज से पहले हमें असंगत प्रतीत होते थे। वे सभी संगत हैं। फलस्वरूप हम उनका भी आविष्कार कर पाएंगे। जो हमारी कल्पनाओं में तो पहले से उपस्थित थे। परन्तु उनका आविष्कार करना युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होता था।

विज्ञान का कार्यक्षेत्र भौतिकता के रूपों और घटनाओं के कारण तथा प्रकार्य को खोजने और उसे परिभाषित करने तक सीमित होता है। जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अंतर्गत विज्ञान का उपयोग समस्याओं को सुलझाने, परिभाषित ज्ञान के आधार पर तुलना करने और तकनीक विकसित करने में किया जाता है। विज्ञान का संबंध खोज तक सीमित होता है। जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संबंध विज्ञान को खोजने के साथ-साथ उसकी उपयोगिता को निर्धारित करने में किया जाता है।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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