ads

Style1

Style2

Style3[OneLeft]

Style3[OneRight]

Style4

Style5

जहाँ समाज में विज्ञान से ऊर्ध्वाधर (Vertical) विकास होता है। वहीँ समाज में कला से क्षैतिज (Horizontal) विकास होता है। विज्ञान की नई खोजों से तकनीक का भी विकास होता है उसी तकनीक के प्रति मनुष्य की समझ द्वारा उसका सहज उपयोग का नाम "कला" है। कला, विज्ञान की खोज और तकनीक दोनों को समाज में स्थापित करती है। ऐसा तो कदापि संभव नहीं है कि विज्ञान के विकास का प्रभाव अन्य विषयों/मुद्दों पर न पड़ता हो। और इसके विपरीत अन्य विषयों/मुद्दों का प्रभाव विज्ञान के विकास की दर पर न पड़ता हो। आज का लेख विज्ञान का अंग्रेजी भाषा (साहित्य) पर प्रभाव दर्शाता है। इसके पहले आपने अर्थशास्त्र का विज्ञान के सिद्धांतों पर प्रभाव के दो उदाहरण पहले भी पढ़े होंगे। जटिल डीएनए (DNA) और बेंजीन की संरचना का हल भी खेल-खेल में खोजा गया था।

अंग्रेजी के भाषाविदों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण देखिये कि उन्होंने सार्वभौमिक सत्य (Universal Truths) और आदतों (Habits) का वर्गीकरण प्रेजेंट इंडेफिनिट टेंस (Present Indefinite Tense) के लिए किया।

क्योंकि वे बहुत अच्छे से जानते हैं कि सार्वभौमिक सत्य (Universal Truths) और आदत समय के साथ बदलते रहते हैं।

Present Indefinite Tense = वर्तमान की अनिश्चित घटनाओं के लिए

अर्थात संदेह वर्तमान में भी बना रहता है। ‪तब तो भविष्य में कंटीन्यूअस (Continuous) और परफेक्ट (Perfect) टेंस होना ही नहीं चाहिए था ! परन्तु ऐसा होता है क्यों ? क्योंकि तब अंग्रेजी के विशेषज्ञों ने सिर्फ भविष्य के लिए सहायक क्रियाओं को एकवचन/बहुवचन के आधार पर वर्गीकृत न करके, उन्हें (भविष्य के लिए) फर्स्ट पर्सन/अदर पर्सन के आधार पर विल (Will) और शैल (Shall) के रूप में वर्गीकृत किया। फिर चाहे पर्सन एक वचन हो या बहुवचन हो। अब आप कहेंगे ये क्या बात हुई ! यहाँ कौन सा वैज्ञानिक दृष्टिकोण है ?


चूंकि समय ब्रह्माण्ड में एक समान नहीं बंटा है। इसलिए भविष्य को विल (Will) और शैल (Shall) में वर्गीकृत करने का यही कारण था कि स्पष्ट हो सके कि हम वाक्यों में जिसका (जिस बारे में) जिक्र कर रहें हैं। वह उसी काल-क्षेत्र में उपस्थित है या किसी अन्य दूसरे काल-क्षेत्र में उपस्थित है।

भविष्य का सीधा सा अर्थ निकलता है कि जो अभी घटित नहीं हुआ है। संभवता कुछ समयांतराल बाद घटित होगा। परन्तु जब आप भविष्य में कंटीन्यूअस (Continuous) और परफेक्ट (Perfect) टेंस के वाक्यों पर गौर करेंगे। तो आप पाएंगे कि वास्तव में वे भविष्यकाल के वाक्य हैं ही नहीं। क्योंकि उन वाक्यों से इस बात का बोध होता है कि घटना या तो संभवतः हो चुकी है या चल रही है। फर्क सिर्फ इतना सा है कि घटना, किसी दूर काल-क्षेत्र में घटित हो रही है या हो चुकी है। जहां पहुँचने में समय लगता है। अर्थात जब वाक्य की संदिग्धता वहां जाकर प्रमाणित होगी। तब वाक्य को कहे काफी समय व्यतीत हो चुका होगा। इस आधार पर भविष्य में भी कंटीन्यूअस (Continuous) और परफेक्ट (Perfect) टेंस होता है। आप अपने मन से कोई भी उदाहरण ले सकते हैं। जिस वाक्य के अंत में कंटीन्यूअस (Continuous) टेन्स के लिए "रहा होगा/रही होगी" तथा परफेक्ट (Perfect) टेंस के लिए "चुका होगा/चुकी होगी" आता है।

1. मम्मी भोजन पका चुकी होंगी।
2. वह मैदान में खेल रही होगी।
3. शिक्षक स्कूल से जा चुके होंगे।

ये घटनाएं भविष्य की संभावना को व्यक्त नहीं कर रही हैं। बल्कि किसी दूसरे काल-क्षेत्र में घटित होने वाली घटनाओं या कार्य की संभावना को व्यक्त कर रही हैं।

याद रहे यह पहला उदाहरण है जब हम समय को दूरी के द्वारा व्यक्त कर रहे हैं। इसके पहले तक आपने दूरी को समय के द्वारा अभिव्यक्त करते, कईयों बार सुना होगा। उदाहरण : अरे, स्टेशन बस पांच मिनट की दूरी पर है। कुछ याद आया ??

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
«
अगला लेख
नई पोस्ट
»
पिछला लेख
पुरानी पोस्ट
  • 1Blogger
  • Facebook
  • Disqus

1 Comment

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति सांख्यिकी दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

    उत्तर देंहटाएं

comments powered by Disqus

शीर्ष