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  • आधार : अध्ययन, मापन या प्रयोग के पूर्ण होने तक की क्रिया में हम जिस विषय-वस्तु में परिवर्तन होने की उपेक्षा करते हैं उसे आधार मानते हैं।
  • भौतिकता : वे गुण, जिनकी उपस्थिति किसी के अस्तित्व होने को दर्शाती है। भौतिकता के गुण कहलाते हैं। इन गुणों के द्वारा जिसकी उपस्थिति को व्यक्त किया जाता है। उसे भौतिकता कहते हैं। स्वाभाविक रूप से भौतिकता में परिवर्तन होता है। जिससे कि इन गुणों की पहचान किसी अन्य निरपेक्ष अवस्था के सापेक्ष ज्ञात की जाती है।
  • मौलिक इकाईयाँ : वे इकाईयाँ होती हैं जो सैद्धांतिक रूप से कभी भी स्वतंत्र नहीं पाई जाती। और जो सदैव व्यवहारिकता में इकाई रूपों का निर्माण करती हैं।
  • विशेष समय : जब अंतरिक्ष / आकाश में किसी विशेष स्थिति में कोई विशेष घटना घटित होती है। जिसका उपयोग अध्ययन करने या किसी प्रयोग को विश्लेषित करने में किया जाता है। उस समय को विशेष समय कहा जाता है।
  • भौतिकता के रूप : मूल अवयव, कण, आकाशीय पिंड, निकाय और निर्देशित तंत्र अब तक के ज्ञात भौतिकता के रूप हैं।
  • काल्पनिक द्रव्य : 
  • काल्पनिक गुण : 
  • काल्पनिक आकृति : 
  • काल्पनिक गति : 
  • आयामिक : दिशात्मक गुण युक्त विषय-वस्तु को आयामिक कहते हैं। यह गुण परिवर्तन की, निर्माण की या किसी विशेष प्रक्रिया की दिशा को अथवा उस प्रक्रिया के चरण को दर्शाता है।
  • आयामिक द्रव्य : 
  • द्रव्य : जो स्थान घेरता है। और जिसका स्थान एक ही समय में अन्य कोई अधिग्रहण नहीं कर सकता।
  • 2- आयामिक द्रव्य : 
  • 3- आयामिक द्रव्य : 
  • 4- आयामिक द्रव्य : 
  • अवयव : प्रत्येक भौतिक संरचना जिन भौतिकता के रूपों में विखंडित होती है। वे भौतिकता के रूप उस भौतिक संरचना के अवयव कहलाते हैं। अर्थात अवयव, उस भौतिक संरचना के आंतरिक भौतिकता के रूप होते हैं। और इस तरह से अवयव भौतिक संरचना की अवस्था को दर्शाते हैं।
  • कण : 
  • पिंड : 
  • निकाय : 
  • निर्देशित तंत्र : 
  • बाह्य बल : 
  • ज्यामिति समय : 
  • सापेक्षता : 
  • निरपेक्षता : 
  • बिग-बैग घटनाक्रम : 
  • गुरुत्वाकर्षण : 
  • ब्लैक होल : 
  • जड़त्वीय निर्देशित तंत्र : गणितीय निर्देशांकों द्वारा निर्देशित तंत्र जो जड़त्व के नियमों का पालन करते हैं जड़त्वीय निर्देशित तंत्र कहलाते हैं।
  • अजड़त्वीय निर्देशित तंत्र : गणितीय निर्देशांकों द्वारा निर्देशित तंत्र जो जड़त्व के नियमों का पालन नहीं करते हैं अजड़त्वीय निर्देशित तंत्र कहलाते हैं। अजड़त्वीय निर्देशित तंत्र मुख्यतः गति के द्वितीय नियम का पालन नहीं करते हैं।
  • ऊर्जा : कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा को प्रवाह के रूप में देखा जाता है।
  • शक्ति : कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। इसे इकाई समय के लिए मापा जाता है। शक्ति को ऊर्जा प्रवाह का विरोध करते हुए देखा जाता है।
  • आतंरिक क्रियाएँ : किसी संरचना को बनाए रखने के लिए उत्पत्तित क्रियाएँ आंतरिक क्रियाएँ कहलाती है। ये स्वतः ही उत्पन्न होती है। और समय के साथ इनमें परिवर्तन की सम्भावना बनी रहती है।
  • बाह्य क्रियाएँ : किसी संरचना के संदर्भ में जिन क्रियाओं के फलस्वरूप उस संरचना में बल आरोपित होता है। बाह्य क्रियाएँ कहलाती हैं।
  • अस्तित्व : 
  • प्रायकिता : 
  • तरंग : 
  • माध्यम : 
  • घटक : किसी भौतिक संरचना के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री घटक कहलाती है। याद रहे घटक के लिए यह जरुरी नहीं होता है कि वह उस भौतिक संरचना में अपनी मौजूदगी दर्शाए। अर्थात घटक बाह्य कारक भी हो सकते हैं। और इस तरह से घटक उस मूल तत्व के रूप होते हैं जिससे भौतिक संरचना का निर्माण होता है।
  • आधारभूत : बने रहना अथवा अपरिवर्तित
  • ब्रह्माण्ड : घटकों के संयुक्त रूप को ब्रह्माण्ड कहते हैं।
  • आधारभूत ब्रह्माण्ड : अपरिवर्तित ब्रह्माण्ड जिसमें परिवर्तन संभव होता है।
  • अवकलन : 
  • समाकलन : 
  • नियम : 
  • सिद्धांत : 
  • प्राकृतिक नियम : भौतिकता के रूपों का आपसी व्यवहार
  • व्यावहारिक नियम : एक निश्चित सीमा तक व्यवस्था कायम करने की युक्ति
  • पदार्थ का एकीकरण : पदार्थ का एक विशेष गुण नियम जिसके अनुसार उस पदार्थ के सभी मूल अवयव एक दूसरे से एक समान व्यवहार करते हैं। जिससे कि वह पदार्थ इस तथ्य को दर्शाता है कि पदार्थ के सभी मूल अवयव गुणात्मक रूप से एक समान होते हैं। पदार्थ का एकीकरण कहलाता है।
  • ब्रह्माण्ड का एकीकरण : अवस्था के आधार पर ब्रह्माण्ड को परिभाषित करना ब्रह्माण्ड की व्यापकता को दर्शना है।
  • पदार्थ का एकीकरण सिद्धांत : एक ही प्रकार के पदार्थ से बना होना।
  • प्रेक्षक विशेष : अध्ययन अथवा परिक्षण करने वाला व्यक्ति विशेष
  • विशेष प्रेक्षक : अध्ययन अथवा परिक्षण करने वाला विशेषज्ञ
  • ब्रह्माण्ड के समूह : एक से अधिक ब्रह्माण्ड होने की अवधारणा
  • शिशु-ब्रह्माण्ड : शिशु के समान गुणात्मक विकास करने वाला ब्रह्माण्ड शिशु ब्रह्माण्ड कहलता है। यह एक अवधारणा है।
  • अदृश्य जगत : दृश्य जगत के पीछे छिपी हुई दुनिया को अदृश्य जगत कहते हैं। यह कल्पना नहीं होती। बल्कि दृश्य जगत के भौतिक रूप का समर्थन करती है। और सैद्धांतिक रूप से भौतिक जगत को समझने में हमारी मदद करती है।
  • प्रकृति : ब्रह्माण्ड की अवस्था परिवर्तन से निर्मित व्यवस्था प्रकृति कहलाती है।
  • प्राकृतिक : प्रकृति द्वारा प्रदत्त विषय वस्तु
  • अप्राकृतिक : अवस्था परिवर्तन के आधार पर प्राकृतिक वस्तुओं का अध्ययन करने वाली प्रणाली अप्राकृतिक कहलाती है। क्योंकि ब्रह्माण्ड में सतत परिवर्तन हो रहा है। फलस्वरूप एक व्यवस्था व्यवस्थित रूप से अव्यवस्था की ओर अग्रसर है।
  • भौतिकी : गति और स्थिति के संयोजित रुप को भौतिकी कहा जाता है।
                                                                                           पुस्तक लेखन का कार्य निरंतर अग्रसर है।


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