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प्रत्येक अवयव, कण, पिंड, निकाय अथवा निर्देशित तंत्र किसी न किसी रूप में क्रियाएँ करते हैं। इन क्रियाओं को हम भौतिकता के रूपों (अवयव, कण, पिंड निकाय या निर्देशित तंत्र) के अस्तित्व की जरुरी शर्त मान सकते हैं। भौतिकता के रूपों के अस्तित्व के लिए जरुरी है कि वे सभी क्रियाओं में भागीदार हों। इस तरह ब्रहमांड के सभी मूलभूत अवयव जो किसी अन्य भौतिकता के रूपों से निर्मित नहीं हैं, ब्रहमांड के अन्य सभी अवयवों से संबंध बना पाते हैं। इसलिए ब्रह्माण्ड में भौतिकता के सभी रूप किसी न किसी रूप में गति करते हैं। क्योंकि ब्रहमांड में विरामावस्था की शर्तों का अस्तित्व ही नहीं है। भाषा विज्ञान में इस बात को तब प्रमाणिकता मिल जाती है। जब कुछ न करने अर्थात बैठे रहने को भी क्रिया के रूप में गिना लिया जाता है।

टीप :
१. एक समान वेग से गतिशील वस्तु या पिंड स्थिर तथा निरपेक्ष मानी जाती है।
२. ब्रह्माण्ड के अस्तित्व के लिए स्वाभाविक तथा स्वतः दोनों क्रियाएँ जिम्मेदार हैं।

आधारभूत ब्रह्माण्ड के बारे में

आधारभूत ब्रह्माण्ड, एक ढांचा / तंत्र है। जिसमें आयामिक द्रव्य की रचनाएँ हुईं। इन द्रव्य की इकाइयों द्वारा ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। आधारभूत ब्रह्माण्ड के जितने हिस्से में भौतिकता के गुण देखने को मिलते हैं। उसे ब्रह्माण्ड कह दिया जाता है। बांकी हिस्से के कारण ही ब्रह्माण्ड में भौतिकता के गुण पाए जाते हैं। वास्तव में आधारभूत ब्रह्माण्ड, ब्रह्माण्ड का गणितीय भौतिक स्वरुप है।
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